फिलिंग

By  , विशेषज्ञ लेख
Jan 01, 2013
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उन दांतों में फिल्लिंग्स यानि कि दांत भराई का काम किया जाता है जो दांत   एक्स तिग्रस्त हो जाते हैं यानि जिनमें छेद हो जाता है  । ऐसा करने से दांत अपनी पूर्व अवस्था जैसा लगने लगता है साथ हीं साथ सामान्य दांत की तरह काम भी करने लगता है  । दांत भराई यानि की फिलिंग करने के पहले दन्त चिकित्सक दांत का सड़ा हुआ हिस्सा बाहर निकलता है  । उसके बाद वह उस क्षेत्र को साफ़ करता है ताकि दांत भराई के पहले रत्ती भर भी कचरा न रह जाये  । कैविटी यानि दांतों का छेद साफ करने के बाद आपका डेंटिस्ट उस धातू से उसे भरता है यानि फिलिंग करता है जो धातू आप चाहते हैं  । फिलिंग के बाद वह खाली क्षेत्र भर जाता है जहाँ बैक्टीरिया पनप सकते हैं; इस तरह फिलिंग दांतों में छेद बढ़ने से रोकता है  ।

सामान्यतः दांतों के छेद को भरने के लिए जिन सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है वे सोना, चांदी, तांबा, टिन, चीनी मिट्टी , दांतों के रंग का राल और कई धातुओं के मिश्रण इत्यादि होते हैं  । धातुओं के मिश्रण में पारा,जिंक, चांदी, तांबा, टिन इत्यादि शामिल होते हैं  ।

कौन सी फिलिंग सर्वश्रेष्ठ  मानी जाती है

किसी भी एक तरह के फिलिंग को सर्वश्रेष्ट नहीं कहा जा सकता  । 

 

आपके लिए कौन सा  फिलिंग उपयुक्त होगा  यह इस बात पर निर्भर करता है  कि :

  • आपके दांतों में छेद कितना गहरा है और किस हद तक मरम्मत किये जाने की जरूरत है
  • आपको किन धातुओं से एलर्जी है
  • आपके कौन से दांत में सामग्री भरने की जरूरत है
  • तथा आप कितना खर्च वहन कर सकते हैं   

यहाँ विभिन्न प्रकार की फिलिंग  की सामग्री के बारे में थोड़ी जानकारी दी जा रही है:

  • सोने की फिलिंग (गोल्ड फिलिंग) : यह काफी लम्बे समय तक टिकता है (यह २० साल से भी ज्यादा टिक सकता है) और कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक फिलिंग के लिए यह सबसे उपयुक्त होता है लेकिन चूँकि यह बहुत महंगा होता है इसलिए हर कोई इसका उपयोग नहीं कर सकता है  ।
  • धातुओं का मिश्रण (रजत/चांदी युक्त ): सोना के मुकाबले यह  सस्ता होता है और संघर्षण के लिए भी यह प्रतिरोधी होता है   । लेकिन इसका रंग थोडा काला होता है जिसकी वजह से इससे दांतों की सुन्दरता पर प्रभाव पड़ता है  । इसी कारण चांदी युक्त मिश्रण को वैसे दांतों में हीं भरा जाता है जो छिपे रहते हैं यानि सामने से दिखलाई न देते हों  ।
  • प्लास्टिक मिश्रित राल: इसका रंग दांतों के रंग जैसा हीं होता है इसलिए इसे उन दांतों में भरा जाता है जो दांत दिखलाई देते है मसलन सामने वाले दांत  । लेकिन बहुत ज्यादा गहरा छेद भरने के लिए यह उपयुक्त नहीं माना जाता  । इसकी फिलिंग करने के बाद यह ३ से १० साल तक टिक सकता है  ।
  • चीनी मिट्टी की फिलिंग: इसका रंग भी दांतों के रंग जैसा हीं होता है इसलिए यह उन दांतों के छेद को भरने के काम में लाया जाता है जो दिखलाई देते हों जैसे सामने वाले दांत  । ये दाग प्रतिरोधी होते हैं लेकिन थोड़े महंगे होते हैं  । 

यदि दाँत बहुत बड़े पैमाने पर छेद की वजह से   एक्स तिग्रस्त हो गया है या दांतों का मुकुट फ्राक्चर हो गया है तो वैसे हालातों में दांतों को टोपी लगाने की जरूरत होती है  ।

 

अगर दांतों की सडन या छेद दांतों के जड़ या तंत्रिका तक पहुँच गया हो तो उपचार के निम्न विकल्प होते हैं:

  • रूट कैनाल चिकित्सा --- इस प्रक्रिया में   एक्स तिग्रस्त तंत्रिका को हटा दिया जाता है  ।
  • लुगदी (पल्प कैपिंग) --- इस प्रक्रिया में   एक्स तिग्रस्त तंत्रिका को जीवित रखने का प्रयास किया जाता है  । 

जब आप फिलिंग करवाते हैं तब क्या होता है

दांत भराई यानि कि फिलिंग करने के पहले दन्त चिकित्सक दांत का सड़ा हुआ हिस्सा बाहर निकलता है  । उसके बाद वह उस क्षेत्र को साफ़ करता है ताकि दांत भराई के पहले रत्ती भर भी कचरा न रह जाये  । कैविटी यानि दांतों का छेद साफ करने के बाद आपका डेंटिस्ट उस धातू से उसे भरता है यानि फिलिंग करता है जो धातू आप चाहते हैं  । फिलिंग के बाद वह खाली क्षेत्र भर जाता है जहाँ बैक्टीरिया पनप सकते हैं; इस तरह फिलिंग...

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