पोलिमयाल्जिया रेयुमेटिका अर्थ्रय्तिस का एक प्रकार है जो की पीठ , जांघ , कूल्हे , गर्दन और कंधो और ऊपरी हाथ तथा शरीर के अन्य हिस्सों में दर्द करता है ।
यह शब्द ग्रीक से आया है पोली (कई) , मायो (मॉस पेशी ) और एल्जिया (दर्द) ।यह तब होता है जब झिल्ली जो की जोड़ , बरसा और कन्दारो को कंधे और कूल्हो के आस पास (जिसे हम सिनोवियम कहते अहिं ) प्रदाह युक्त हो जाता है ।हालाँकि बिमारी जोड़ो की ही होती है (विशेषकर कंधे और कूल्हे ), असुविधा ऊपरी हाथ और जांघों में महसूस होती है ।इस प्रकार के दर्द को रेफार्ड पेन कहते हैं क्योंकि यह एक हिस्से में होता है लेकिन लक्षण किसी अन्य हिस्से में करता है ।
प्राय पोलिमयाल्जिया रेयुमेटिका उन लोगो को प्रभावित करता है जो की ५५ साल से ज्यादा उम्र के होते हैं जिसमे की महिलाए पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा प्रभावित करती है ।अगर इसका उपचार नहीं किया गया तो यह अकडन और बहुत अपंगता करा सकता है ।कुछ दशा मेहलंकी लक्षण बदतर नहीं होते हीं और कुछ सालो में कम हो सकते हैं ।कुछ घटनाओं में पोलिमयाल्जिया रेयुमेटिका जयंत सेल अर्तेरय्तिस से सम्बन्धित होता है जिसमे की गले और सर की रुधिर वाहिनी और कभी कभी किसी और अन्य हिस्से की में प्रदाह हो जाता है ।जयंत सेल अर्त्रय्तिस के आम लक्षणों में होते हैं द्रष्टि की समस्या , जबड़े में दारद और सिरदर्द ।अगर इसका उपचार नहीं किया गया तो जयंत सेल अर्त्राय्तिस अंधापन और अन्य जटिलताये करा सकता है ।

