पैरानायड सिज़ोफेरनिया

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 06, 2013
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पैरानायड सिज़ोफेरनिया एक गंभीर मानसिक विकार है जिसमें मरीज़ को आडिटरी हैल्युसिनेशन होता है, इसका अर्थ है ऐसी आवाज़ें सुनाई देना जो वास्तविक ना हों।

paranoid schizophreniaसिज़ोफेरनिया का यह सबसे सामान्य प्रकार है और इसमें मरीज़ को हमेशा ही उत्पीड़न का भ्रम होता है। कभी कभी ऐसा भी होता है कि मरीज़ वास्तविक और अवास्तविक अनुभवों में फर्क अनुभव नहीं कर पाता। मरीज़ की भावनात्मक प्रतिक्रियाएं और सामाजिक स्थितियां सामान्य होती हैं। पैरानायड सिज़ोफेरनिया के मरीज़ों में दूसरे प्रकार के सिज़ोफेरनिया के भी लक्षण पाये जाते हैं। आइए जानें उन लक्षणों के बारे में-

 

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पैरानायड सिज़ोफेरनिया के लक्षण

अजीब बर्ताव करना:
पैरानायड सिज़ोफेरनिया के मरीजों में एक लक्षण यह भी होता है कि जब वह बातें करता है तो बात करते समय उसका व्यवहार बहुत अजीब सा हो जाता है।

कैटाटोनिक:
कैटाटोनिक में मरीज की शारीरिक गतिविधियों ठीक प्रकार से नही होती है।   

अनडिफरेंशियेटेड:
सिज़ोफेरनिया के मरीज़ जिनमें इस बीमारी का ठीक प्रकार से पता नहीं लग पाता जैसे यह पैरानायड, कैटाटोनिक या किसी और प्रकार का सिज़ोफेरनिया है। तो उन्हें अनडिफरेंशियेटेड नाम दिया जाता है।

रेसिड्युअल:
इसमें वह मरीज़ आते है जिनमें बहुत पहले सिज़ोफेरनिया पाया गया लेकिन उनमें कैटाटोनिक बिहेवियर, डिल्युज़न, हैल्यूसिनेशन, बातें करने में और व्यवहार में बेतरतीब होने जैसे लक्षण नहीं पाये जाते।

 

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पैरानायड सिज़ोफेरनिया के सही कारणों का पता अब तक नहीं चल पाया है लेकिन ऐसा माना गया है कि यह अनुवांशिक और पर्यावरणीय कारकों की वजह से होता है। यह लगभग एक प्रतिशत आम जनसंख्या में पाया जाता है और 10 प्रतिशत तक उन लोगों में पाया जाता है जिनके परिवारों में पहले से ही किसी को यह बीमारी है।

सिज़ोफेरनिया के मरीजों के दिमाग में न्यूरोट्रांसमीटर्स जैसे केमिकल्स अनियंत्रित हो जाते हैं। और यह न्यूरोट्रांसमीटर्स दिमाग में मौजूद नर्व सेल्स को संदेश देने का काम करते हैं।

हमारे दिमाग में मौजूद दूसरे रासायन जैसे सेरोटोनिन और नोरेपाइनफ्राइन भी महत्वपूर्ण हैं।


पैरानायड सिज़ोफेरनिया का निदान

इस बीमारी का पता लगाने के लिए मरीज़ का शारीरिक परीक्षण किया जाता है और साथ ही उसकी चिकित्सा का इतिहास भी देखा जाता है। ब्लड और यूरीन के परीक्षण से इस बीमारी की पुष्टि होती है। कुछ संक्रमण जैसे कैंसर, नर्वस सिस्टम डिज़ार्डर, थायरायड डिज़ार्डर में भी इस बीमारी के साइकोटिक लक्षण पाये जाते हैं।

अगर किसी मरीज़ में इस प्रकार के लक्षण पाये जाते हैं तो उसे मनोवैज्ञानिक के पास जाने की सलाह दी जाती है। बीमारी के कारणों को जानने के बाद उसके निदान के तरीकों पर ध्यान दिया जाता है।

 

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पैरानायड सिज़ोफेरनिया से चिकित्‍सा

इस बीमारी का कोई समाधान नहीं है लेकिन इसकी स्थितियों को संभाला जा सकता है। अगर मरीज़ की स्थिति आत्मघात या आत्महत्या तक पहुंच जाती है तो ऐसी स्थिति में उसे अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ सकता है। पैरानायड सिज़ोफेरनिया के इलाज का सबसे आसान तरीका है एण्टीसाइकोटिक मेडिकेशन। इन दवाओं का असर अलग अलग मरीज़ो पर अलग तरीके से होता है इसलिए कुछ परिस्थितियों में ड्रग्स भी दिये जाते हैं।

मेडिकेशन से इस बीमारी में बहुत हद तक आराम मिलता है। जब मरीज़ को उसकी हालत ठीक लगने लगती है तो वह दवाएं लेना छोड़ देता है लेकिन ऐसी स्थितियों में भी दवाएं लेनी चाहिए। कुछ मरीज़ों को दवाओं के साथ साथ साइकोसोशल रिहैबिलिटेशन थेरेपी की भी ज़रूरत होती है। शोधों से ऐसा पता चलता है कि वो मरीज़ जिन्हें दवाओं के साथ साइकोसोशल रिहैबिलिटेशन थेरेपी भी दी जाती है उन्हें जल्दी आराम मिलता है। रिहैबिलिटेशन जैसे साइकोसोशल चिकित्सा के तरीकों की मदद से सामाजिक और व्यावसायिक प्रशिक्षण दिये जाते हैं जिनसे की मरी़ज़ लोगों के साथ समूह में रहना सीख सके।

कुछ मरीज़ों में जिनमें कि पैरानायड सिज़ोफेरनिया के लक्षण पाये जाते हैं उन्हें काग्निटिव थेरेपी भी दी जाती है। हालांकि सिज़ोफेरनिया के मरीज़ों को एण्टी साइकोटिक दवाएं और थेरेपी दी जाती है लेकिन ऐसी स्थितियों में भी उन्हें दोस्तों और परिवारजनों का समर्थन चाहिए होता है।

 


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