प्रोस्ट्रेट स्पेसिफिक एण्टीजन रक्त जांच ऐसी जांच है जिसमें कि व्यक्ति के रक्त के अंदर पी एस ए की मात्रा का पता लग जाता है । पी एस ए ऐसा रासायन होता है जो कि प्रोस्ट्रेट द्वारा बनाया जाता है (प्रोस्ट्रेट ग्लैंड वो ग्लैंड है जो कि पुरूषों में ब्लैडर के पास होती है ) जो कि सीमेन नामक तरल पदार्थ बनाती हैं । पी एस ए का स्तर सामान्यत: पुरूषों में उम्र के साथ बढ़ता जाता है लेकिन सामान्य से अधिक मात्रा में पी एस ए के होने का अर्थ है कि कैंसर प्रोस्ट्रेट में फैल रहा है ।
लेकिन पी एस ए के अधिक मात्रा में होने की स्थितियां नान कैंसरस भी हो सकती हैं जैसे प्रास्टेटाइटिस (प्रोस्ट्रेट का सूज जाना ), बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेजि़या, प्रोस्ट्रेट का बढ़ना जो कि अधिक उम्र के पुरूषों को प्रभावित करता है ।
पी एस ए का प्रयोग
पी एस ए का प्रयोग प्रोस्ट्रेट में कैंसर का पता लगाना होता है । वो पुरूष जिनमें कि प्रोस्ट्रेट कैंसर होता है उनमें पी एस ए से यह पता किया जा सकता है कि सर्जरी के बाद कैंसर दोबारा तो नहीं हुआ या दवा और रेडियेशन थेरेपी देने के बाद कैंसर की स्थिति बढ़ रही है या घट रही है ।
प्रोस्ट्रेट कैंसर के लिए स्क्रीनिंग जांच करानी चाहिए या नहीं यह विवादास्पद विषय है । यू एस में पुरूषों में प्रोस्ट्रेट कैंसर सबसे आम तरीके का कैंसर है जो कि मृत्यु का कारक है ।
पी एस ए जांच से प्रोस्ट्रेट कैंसर के लक्षण प्रदर्शित करने से पहले ही कैंसर की शुरूआती स्थिति का पता लगाया जा सकता है । बहुत से शोधकर्ताओं का मानना है कि पुरूषों में मृत्यु दर कम करने के लिए पी एस ए जांच एक अच्छा उपाय है । ऐसा इसलिए भी है क्योंकि शुरूआती दौर में कैंसर से बच पाना बहुत ही आसान होता है ।
लेकिन, कई विशेषज्ञों का ऐसा भी मानना है कि अगर पी एस ए जांच बहुत बार की गयी तो इससे पुरूषों में कैंसर के होने की सम्भावना बढ़ जाती है ।
बहुत से अधिक उम्र वाले पुरूषों में भी प्रोस्ट्रेट कैंसर होता है जो कि किसी भी प्रकार की समस्या नहीं दर्शाता । इस प्रकार के बहुत से कैंसर का अगर पता नहीं चला तो यह किसी प्रकार का नुकसान भी नहीं पहुंचाते ।
प्रोस्ट्रेट कैंसर की चिकित्सा के गंभीर अतिरिक्त प्रभाव भी हो सकते हैं, बीमारी का पता लगना कुछ पुरूषों में फायदे से ज़्यादा नुकसानदायक भी हो सकता है । दुर्भाग्यवश अभी तक ऐसे तरीके नहीं ढूढें गये हैं जिनसे कि यह पता चल सके की किस प्रकार के कैंसर की चिकित्सा की जानी चाहिए और किस प्रकार के कैंसर नुकसानदायक नहीं होते ।
शोध किये जा रहे हैं जिनसे इस विवाद का समाधान निकाला जा सके । बहुत से चिकित्सक अधिक उम्र के पुरूषों के लिए पी एस ए जांच की सलाह नहीं देते । कई बार चिकित्सक मरीज़ पर ही यह निर्णय छोड़ते हैं कि उसे पी एस ए जांच कराना चाहिए या नहीं ।
अगर आप पी एस ए जांच कराने जा रहे हैं तो आपके दिमाग में कुछ खास बातें आती हैं:
कोई भी नहीं जानता कि क्या जांच से वास्तव में चिकित्सा हो सकती है । मेरा ख्याल है कि मुझे कुछ समय और इन्तज़ार करना चाहिए ।
वो पुरूष जो कि प्रोस्ट्रेट कैंसर की जांच कराना चाहते हैं, उनके लिए पी एस ए जांच डिजिटल रेक्टल इक्ज़ाम के साथ होती है ।
बहुत से विशेषज्ञ ऐसी सलाह देते हैं कि पुरूषों को हर दो से तीन साल पर स्क्रीनिंग करानी चाहिए । वो पुरूष जिनमें कैंसर का अधिक जोखिम है उन्हें 45 वर्ष की उम्र से ही स्क्रीनिंग करानी शुरू कर देनी चाहिए । व्हाइट पुरूषों की तुलना में अफ्रीकन अमेरिकन पुरूषों में या उन पुरूषों में जिनके परिवार में पहले से ही किसी को कैंसर है उनमें इस बीमारी का जोखिम 70 प्रतिशत तक अधिक होता है ।
75 वर्ष से अधिक उम्र के पुरूषों में पी एस ए जांच ज़्यादा उपयोगी नहीं होती क्योंकि इस उम्र के बाद जीवन की सम्भावना भी कम हो जाती है । दूसरा कारण यह भी है कि प्रोस्ट्रेट कैंसर...

