पक्षाघात और इसके प्रभाव

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 15, 2011
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स्ट्रोक यानी पक्षाघात बहुत ही गंभीर बीमारी हैं। क्या आप जानते हैं। विश्व में हर 45 सेकन्ड में किसी न किसी को स्ट्रोक हो जाता है एक वर्ष में लगभग 700,000 लोग पक्षाघात से पीडि़त होते हैं। इतना ही नहीं विश्व में हर तीन मिनट में स्ट्रोक के एक रोगी की मौत हो जाती है और पक्षाघात हृदयरोग और कैंसर के बाद मृत्यु का तीसरा सबसे बड़ा कारण है। क्या आप जानते हैं हमारे देश में 60 वर्ष से ऊपर की उम्र के लोगों में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण स्ट्रोक है। लेकिन हैरानी की बात ये है कि मेट्रो सिटीज में 50 फीसदी से अधिक लोगों को इस बात की जानकारी नहीं कि आखिर पक्षाघात है क्या। क्या आप जानते हैं पक्षाघात और इसके प्रभाव बहुत ही खतरनाक हो सकते हैं। इतना ही नहीं पक्षाघात से मौत का जोखिम भी बना रहता है। आइए जानें पक्षाघात और इसके प्रभावों के बारे में कुछ और बातें।


क्या  है पक्षाघात

  • दिमाग के किसी भाग में, खून की नस जाम होने से उस भाग को नुकसान पहुंच सकता है। इसे पक्षाघात कहते हैं। अचानक मस्तिष्क के किसी हिस्से मे रक्त आपूर्ति रुकना या मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका फट जाना और मस्तिष्क की कोशिकाओं के आसपास खून भर जाने से स्ट्रोक यानी पक्षाघात होता है।
  • मस्तिष्क में रक्त प्रवाह कम होने, अचानक रक्तस्राव होने से मस्तिष्क का दौरा पड़ जाता है।
  • स्ट्रोक में शरीर के एक हिस्से को लकवा मार जाता है। या एक तरफ के किसी हिस्से को नुकसान पहुंच सकता है। मस्तिष्क में कोई रक्तवाहिका लीक हो जाती है, तब भी स्ट्रोक हो सकता है।
  • स्ट्रोक को सेरिब्रोवैस्कुलर दुर्घटना या सीवीए के नाम से भी जाना जाता है।


पक्षाघात के प्रभाव

  • पक्षाघात के कारण दीर्घकालीन विकलांगता हो सकती है। या फिर हाथ-पांव काम करना बंद कर सकते है।
  • स्ट्रोक 20 वर्ष में सिकल सेल एनीमिया से पीडि़त लोगों की मौत का कारण बनता है।
  • 15 से 59 आयुवर्ग में मृत्यु का पांचवां सबसे बड़ा कारण है।
  • रोगी को देखने, बात करने या बातों को समझने यहां तक की खाना निगलने में भी परेशानी होने लगती हैं।
  • यदि रोगी की पक्षाघात के दौरान ब्रेन का बहुत बड़ा भाग प्रभावित हुआ है तो श्वास संबंधी समस्याएं भी आ सकती है। या फिर बेहोशी छाने लगती है।
  • पक्षाघात के कारण अंधता होने का खतरा भी बढ़ जाता है।


क्यों होता है पक्षाघात 

  • उच्च-रक्तचाप के 30 से 50 आयुवर्ग के रोगियों को स्ट्रोक का जोखिम रहता है। 
  • मधुमेह के रोगियों में स्ट्रोक का जोखिम 2-3 गुना अधिक रहता है।
  • ब्लड प्रेशर, शुगर, हृदय रोग जैसी समस्याओं के कारण।
  • स्मोंकिग, जंक फूड, ज्यादा तैलीय भोजन का आदी होना।
  • मस्तिष्क की किसी धमनी के संकीर्ण या अवरुद्ध होने के कारण।
  • अधिक ठंडे मौसम में बढ़ा हुआ कॉलेस्टॉ्ल या उच्च रक्त कॉलेस्ट्रोल स्तर।
  • पौष्टिक आहार न लेना।
  • अधिक मोटापा।
  • शराब, सिगरेट और तंबाकु का सेवन अधिक करना।
  • नशीली दवाइयों का सेवन।
  • शारीरिक सक्रियता न होना।
  • आनुवांशिक या जन्मजात परिस्थितियां।
  • रक्त संचार तंत्र के विकार।
  • अचानक अज्ञात कारण से गंभीर सिरदर्द।
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