टूनिकेट परीक्षण

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 11, 2009
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BLood testहर बीमारी को जांचने के लिए कुछ परीक्षण किए जाते हैं। ये सभी परीक्षण डॉक्टर की सलाह व निर्देशों के अनुसार लैब में किए जाते हैं। हर बीमारी को पता लगाने के लिए बीमारियों के परीक्षण अलग-अलग किए जाते हैं। कई बार एक ही बीमारी को जांचने उसकी, गंभीरावस्था और वर्ग को पता लगाने के लिए भी परीक्षण किए जाते हैं। तो कई बार क्लीनिकल परीक्षण अलग से करवाए जाते हैं। टूनिकेट परीक्षण एक ऐसा ही परीक्षण है जो कि महामारी और संक्रमण का पता लगाने के लिए प्रयोग में लाया जाता है।  यह एक क्लीनिकल परीक्षण है। आइए जानते हैं टूनिकेट परीक्षण के बारे में कुछ दिलचस्प बातें।

-    टूनिकेट परीक्षण एक क्लीनिकल परीक्षण है। जिसमें रक्त जांच के जरिए पता लगाने की कोशिश की जाती है कि रोगी की रक्तस्रावी प्रवृति क्या है। रोगी डेंगू बुखार के किस रूप से संक्रमित है इसकी भी जांच इसी परीक्षण के द्वारा की जाती है। 
-    इसी परीक्षण के जरिए जांच की जाती है कि रोगी कितना कमजोर है उसकी प्रतिरोधक क्षमता कितनी है।

-    टूनिकेट परीक्षण को थ्रोम्बोसाइटोपेनिया की पहचान के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।

-    यह परीक्षण विश्व स्वास्थ्‍य संगठन द्वारा निर्धारित किया गया था। इसके जरिए डेंगू बुखार के लक्षणों और वर्ग की जांच की जाती है।-इस टेस्ट में खून की एक बूंद ली जाती है उसके बाद ही परीक्षण किया जाता है लेकिन टेस्ट के लिए रक्तचाप भी मापा जाता है यदि रक्तचाप मापने वाली मशीन के बीच में हर प्रति 10 वर्ग इंच के बीच 10 मिनट तक रहता है तो टेस्ट पॉजिटिव होता है।
-इस टेस्ट के दौरान कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। महिलाओं के टेस्ट के दौरान यदि उन्हें महावारी है तो भी इस टेस्ट को सही से जांचने में दिक्कतें आ जाती हैं।

 

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