टी.बी उन्मूलन में निजी क्षेत्र की सहभागिता

By  , द लिली एमडीआर-टीबी के सौजन्‍य से
Mar 22, 2012
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tb unmoolan me niji shetra ki bhaagidaariप्राचीन काल से ही मानव का ट्यूबरकुलासिस (टी.बी.) जैसे धातकरोग से परिचय रहा है। इसकी चर्चा वेद और आयुर्वेदिकसंहिता में है। जर्मनी में डा. रॉबर्ट कोच मार्च 1882 में ट्यूबरकुलोसिस के कारक घटक, मैकोबैकट्रि‍यम बेकलिस (Mycobacterium Baccillus) की खोज हुई। आज टी.बी. मानव जाति के लिए अभिशाप बन कर उभरा है। विश्वस स्तbर पर किसी भी दूसरे रोगों की अपेक्षा सर्वाधिक लोग ट्यूबरकुलोसिस से मरते हैं। प्रत्येएक दिन 20,000 से अधिक लोगों में सक्रिय टीबी का विकास होता है तथा 5.000 लोग मरते हैं। विश्वै की एक तिहाई जनसंख्यार इससे पीडि़त है। टीबी फैलाने वाला बैक्टिरियम खुली हवा के माध्याम से सामान्यि ठंड की तरह व्य क्ति से व्यखक्ति में फैलता है। सक्रिय टीबी वाला व्य क्ति औसत एक वर्ष में 10-15 व्यीक्ति को प्रभावित कर सकता है। प्रत्येबक वर्ष विश्वस में टीबी के 80-90 लाख नये मामले आते हैं तथा इस बीमारी के कारण करीब 20 लाख मौतें होती हैं, शनी, तीन मिनट में 2 व्यमक्तियों की मृत्युे तथा प्रतिदिन करीब 1000 मृत्युस।


 डॉट्स (Directly Observed Treatment)


लंबे अनुसंधान के बाद इस बीमारी के समापन में प्रभावी डॉट्स नाम की दवा की खोज हुई। डायरेक्ट ली ऑब्ज,र्व्डह ट्रीटमेंट, (डॉट्स) भारतवर्ष में सफल हुआ तथा पूरे भारतवर्ष में संशोधित राष्ट्रीहय यक्ष्मा  नियंत्रण कार्यक्रम (National Tuberculosis Control Program- आरएनटीसीपी) के रूप में 1997 से क्रियान्वित हो रहा है। आरएनटीसीपी में 10 रोगियों में 8 इस प्रोग्राम के तहत टीबी से निजात पाते हैं।

सार्वजनिक- निजी क्षत्रों की सहभागिता (Publisc Private Partnership)


यह माना गया है कि केवल सरकारी प्रयासों से ही टीबी उन्मूbलन नहीं हो सकता है। आज गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) तथा निजी क्षेत्र के मेडिकल प्रैक्टिसनर यानी निजी डॉक्टकर टीबी के उन्मूैलन में अपना योगदान दे रहे हैं। राष्ट्री य ट्यूबरकुलोसिस कार्यक्रम में कुछ विशेष नीतियां हैं जिसमें सरकार टीबी के नियंत्रण के अपने सामान्यअ लक्ष्यर हेतु एनजीओ तथा प्राइवेट सेक्टकर के साथ मिलकर कार्य करती है। यह सर्वविदित है कि निजी क्षेत्र अधिकसंख्य  रोगियों के संपर्क में है। करीब आधे टीबी रोगियों का इलाज प्राइवेट पैक्टिसनर द्वारा किया जाता है। इसलिए नेशनल टीबी कंट्रोल प्रोग्राम में प्राइवेट प्रैक्टिसनर की सहभागिता महत्वइपूर्ण है। यह माना गया है कि निजी डॉक्टशर को टीबी के इलाज हेतु नये, बेहतर तथा शार्टर ड्रग, यानी कम समय तक चलने वाली दवाओं की जानकारी नहीं है। रोगी कन्सलल्टेगशन चार्ज, डायग्नोोस्टिक टेस्टक तथा दवाओं का मूल्यी वहने करने में समर्थ नहीं होते हैं। इस कारण बीमार व्यसक्ति दो अथवा तीन माह के बाद ट्रटमेंट जारी नहीं रख पाता है। इसी कारण सरकार ने नयी नीति बनाई है।


सहभागिता का दायरा

 

पर्याप्त  प्रशिक्षण के बाद निजी प्रैक्टिसनर के क्षरा निःशुल्कै एंटी-टीबी ट्रीटमेंट (डॉट्स) दवा की व्यंवस्था  करने की रणनीति वि‍कसित की गई ताकि तय शुदा मानकों व निर्देशों के अनुरूप इलाज सुनिश्चिरत किया जा सके। इस तरह रोगियों को दी जाने वाली सभी दवाओं की आपूर्ति निजी डॉक्टवर को सरकारी एजेंसियों द्वारा की जाती है।


दूसरी तरफ, सरकार द्वारा बहुत से प्राइवेट लैबोरेट्री टेक्निशियन को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सरकारी हेल्थर वर्कर का रोल इस क्षेत्र में काफी व्यावपक है। उसे प्राइवेट डॉक्ट र द्वारा इलाजरत टीबी रोगियों के पास नियमित जाने की जरूरत है ताकि टीबी को पूरी तरह समाप्ता किया जा सके। यदि कोई ट्यूबरकुलासिस रोगी प्राइवेट पैक्टिसनर के पास इलाज हेतु जाता है, जिसे सरकार द्वारा प्रशिक्षित किया गया है, तब वह स्पूरटम परीक्षण के लिए नाम मात्र का रकम चार्ज कर सकता है। इस तरह दवा सहित सभी सेवाएं निःशुल्कय हैं तथा रोगी से कोई अन्यट शुल्क  नहीं मांगा जाना चाहिए। इसके एवज में सरकार डॉक्टइर को वित्तीसय सहायता देती है।


सहभागिता के लिए योजना

 

प्राइवेट प्रैक्टिसनर के लिए टीबी रोगियों की सहायता के कई विकल्पद खुल हैं। उनहें ही यह निर्धारित करना है कि ये किस तरह से ट्यूबरकुलासिस के उन्मूरलन में अपना योगदान दे सकते हैं। इसके लिये विकल्पोंर की चर्चा यहां की जा रही हैंः

केवल रेफरः निजी प्रैक्टिसनर टीबी के सभी मरीजों की नजदीकी माइक्रोस्कॉकपी तथा इलाज केंद्र पर भेज सकते हैं। रोगी को सूचित कर सकते हैं कि वे सरकारी माइक्रोस्कॉनपी तथा इलाज केंद्रों से निःशुल्कक एंटी ट्यूबरकुलोसिस ड्रग तथा निःशुल्कत स्पूकटम परीक्षण सेवाएं प्राप्ती करें। वे सुनिश्चित करते हैं कि रोगी वास्तरव में उस केंद्र तक पहुंच सके तथा उनका इलाज प्रारंभ हो सके। रोगी के पास यह विकल्पत खुला है कि वे निजी प्रैक्टिसनर से इलाज करा सके अथवा इलाज केंद्र से।

केवल ट्रीटमेंट ः बहुत से निजी प्रैक्टिसनर के पास स्पूकटम परीक्षण के लिए लैबोरेट्री नहीं है। फिर भी वे इलाज के लिए तैयार हैं तथा उन्हें  डॉट्स पर सरकार द्वारा प्रशिक्षण दिया गया हैं। सरकार द्वारा निःशुल्कस एंटी ट्यूबरकुलोसिस ड्रग की आपूर्ति की जाती है। इसीलिए डॉक्टार द्वारा कोई शुल्कै नहीं लिया जा सकता है।

स्पू टम टेस्टिंग तथा इलाज ः
जिनके पास अपने क्ली्निक से संलग्नै लैबोरेट्री है तथा वे स्पूेटम परीक्षण तथा इलाज दोनों में प्रशिक्षित है वे डॉक्टनर कन्सकल्टे शन फी का शुल्कब तथा अपने लैबोरेट्री में स्पूषटम परीक्षण के लिए नाम मात्र का शुल्कं ले सकते हैं।


केवल स्पू टम टेस्टिंगः बहुत से निजी लैबोरेट्री सरकार के साथ सहयोग कर रहे हैं तथा निःशुल्कत स्पूोटम परीक्षण की व्य्वस्थाट कर रहे हैं। बहुत से ऐसे चेरिटेबल अस्पसताल हैं जो गांव तथा स्ल‍म एरिया में कार्यरत हैं तथा वे नजदीक के रोगियों के लिए दवा की व्यहवस्थाज करते हैं तथा उनका परीक्षण करते हैं जिन्होंतने दवा रोक दी हैं।

यह याद रखें कि नियमित तथा पूर्णइलाज के साथ प्रारंभ में इलाज कर ट्यूबरकुलोसिस को ठीक किया जा सकता है। यह महत्वखपूर्ण है कि अधिक से अधिक प्राइवेट प्रैक्टिसनर तथा लेबोरेट्री डॉट्स प्रोग्राम में शामिल हो ताकि ट्यूबरकुलोसिस रोगियों का पूर्ण तथा निःशुल्क् इलाज हो सके।

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