गर्भनिरोध के पांच प्राकृतिक उपाय

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 04, 2012
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Quick Bites

  • अनचाहे गर्भ या एसटीडी से संक्रमित होने के खतरे में डालना।
  • विदड्रॉल या कोइटस इन्टरप्टस गर्भनिरोध का प्राकृतिक तरीका।
  • ओव्युलेशन के दिनों को पहचान सकता है बेसल बॉडी टेम्परेचर।
  • विधियां भरोसेमंद नहीं होती हैं गर्भनिरोध की प्राकृतिक विधियां।

गर्भनिरोध का अर्थ है, सोच समझकर गर्भधारण न होने देना। गर्भधारण के लिए पुरुष के वीर्य में उपस्थित शुक्राणुओं का महिला के शरीर में मौजूद अंडाणुओं से मिलता है। यूं तो, गर्भधारण का रोकने के कई उपाय बाजार में उपलब्ध हैं, लेकिन कई लोग यह उपाय नहीं अपनाना चाहते। वह प्राकृतिक उपायों को ज्यादा पसंद करते हैं।  

natrual solutions for birth control
गर्भनिरोध की कुछ प्राकृतिक विधियां भी हैं जिनमें गर्भधारण रोकथाम के लिए किन्हीं उपकरणों या दवाओं का प्रयोग नहीं किया जाता है। हालांकि, इन उपायों की कामयाबी को लेकर लोगों में अलग-अलग राय है, फिर भी इन पर काफी बातें होती हैं। इन पर केवल अपनी जानकारी बढ़ाने के लिए चर्चा की जा सकती है और इनकी असफलता की उच्च दर को भी सदैव ध्यान में रखा जाना चाहिए।

 

गर्भनिरोध के प्राकृतिक उपाय


विदड्रॉल या कोइटस इन्टरप्टस

स्खलन होने से पहले पुरूष अपने लिंग को योनि से पूरी तरह से बाहर निकाल लेता है। यह गर्भनिरोध की बहुत जोखिमभरी विधि है क्योंकि ज़्यादातर मामलों में स्खलन पूर्व रिसाव में वीर्य रहता है जो गर्भधारण का कारण बन जाता है।

 

लय पद्धति

गर्भनिरोध को प्राकृतिक तरीके से रोकने के लिए एक और सबसे आम तरीका है कि संभोग न‍ किया जाए। इस पद्धति में लिंग को योनी से उस समय संपर्क में न लाया जाए जब स्त्री ओव्युलेशन में हो। यह तकनीक तभी अच्छे से काम करती है जब किसी महिला के मासिक चक्र नियमित हो।

बेसल बॉडी टेम्परेचर

इस पद्धति से आप आसानी से ओव्युलेशन के दिनों को पहचान सकती हैं और सेक्स को पहले और बाद में कुछ दिनों के लिए टाला जा सकता है। आप इससे हर सुबह सटीक 'बेसल' थर्मामीटर के साथ हर सुबह बेसल शरीर के तापमान ले सकती है। और ओव्युसलेशन के बाद तापमान में वृद्धि को जान सकती है। बीमारी या नींद में कमी शरीर के तापमान को बदल सकती है और यही इस पद्धति को अविश्वसनीय बनाती है।


सर्वाइकल म्यू्कस विधि

इस विधि योनि स्रवा की मात्रा और बनावट में परिवर्तन की खोज करता है जो शरीर में बढ़ते एस्ट्रोजन के स्तर को  प्रतिबिंबित करता है। आपके पीरियड्स के बाद कुछ दिन किसी भी प्रकार का डिस्चार्ज नहीं होता है लेकिन कुछ मटमैला सा चिपचिपा म्यूाकस एस्ट्रोजन के रूप में वृद्धि करने लगता है। जब डिस्चार्ज की मात्रा में वृद्धि होने लगती है और वह स्पष्ट‍ और चिपचिपा हो जाता है तो ओव्युलेशन पास ही होता है। और जब फिर से डिस्चार्ज बंद होकर चिपचिपा मटमैला म्यूकस हो जाता है तो इसका मतलब ऑव्युलेशन चला गया है।


लेक्टोशनल इनफर्टिलिटी

लेक्टोशनल इनफर्टिलिटी की पद्धति इस विचार पर आधारित है कि कोई भी महिला तब तक गर्भवती नहीं हो सकती जब तक वह अपने बच्चे को स्तनपान कराती है। यह सही है बच्चे को जन्म देने के बाद अगर महिला स्तनपान नही कराती तो जल्दी आव्युलेट नहीं होती है। लेकिन जो महिला स्तनपान कराती है वह डिलीवरी के 10 से 12 सप्ताह के अन्दर ही ओव्युलेट होने लगती है। ले‍किन कई बार स्तनपान कराने के दौरान भी कई महिलाएं गर्भवती हो जाती है।

इन उपायों को लेकर समाज में चर्चा जरूर की जाती है, लेकिन इन उपायों की कामयाबी हमेशा से सवालों के घेरे में रही है। बेहतर यही रहेगा कि अगर आप गर्भधारण नहीं करना चाहतीं तो आप अधिक वैज्ञानिक उपायों का रुख करें। या फिर इन उपायों को आजमाने से पहले किसी विशेषज्ञ से सहायता जरूर लें।

 

 

 

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