क्षय रोग की जटिलता

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Mar 22, 2012
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क्षय रोग (टीबी, तपेदिक या ट्यूबरकुलोसिस) बहुत ही भयानक रोग है। इसका अगर इलाज नहीं किया गया तो आदमी की मौत हो सकती है। टीबी मुख्य रूप से फेफडे़ से जुडी हुई बीमारी है इसलिए टीबी होने पर सबसे ज्यादा दिक्कत सांस लेने में होती है। क्षय रोग किसी मरीज के संपर्क में आने से ही होता है। किसी भी क्षय रोगी के संपर्क में आने से इस रोग के होने का खतरा रहता है। दो हफ्ते से ज्यादा खांसी लगातार बने रहना, तेज़ बुखार आना, खांसी के दौरान मुंह से खून निकलना इसकी जटिलता को दर्शाते हैं। अनियमित जीवनशैली और अनुचित खान-पान भी तपेदिक का वजह बन सकती है।



क्षय रोग होने पर परेशानी –
तपेदिक होने पर आदमी के स्वास्‍थ्‍य में गिरावट आ जाती है और मरीज बहुत ही कमजोर हो जाता है। आइए हम आपको क्षय रोग की जटिलता के बारे में बताते हैं :

बुखार और सर्दी जुकाम -
तपेदिक होने पर बुखार लगातार बना रहता है। सर्दी-जुकाम जैसी समस्याएं भी हो जाती हैं जिसकी वजह से मरीज हमेशा ठंडक का अनुभव करता है। खांसी के साथ अगर ये सब समस्यावएं हैं तो अपने बलगम की जांच तुरंत ही कराना चाहिए।

थकावट और कमजोरी -
क्षय से ग्रस्त मरीज अगर थोडा सा भी काम करता है तो उसे थकावट महसूस होती साथ ही उसकी सांस फूलने लगती हैं। टी.बी. के बैक्टीरिया के आक्रमण से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। जिससे क्षय रोगी के शरीर की एनर्जी कम होने लगती है।

कंधे और हड्डियों में दर्द -
क्षय रोगी को कंधे व हाड्डियों में दर्द की शिकायत शुरू हो जाती है। टीबी होने पर गर्दन के पास की ग्रंथयों और रीढ की हड्डी में सबसे ज्यादा दिक्कत होती है।

पसीना आना –
क्षय रोगी को हर मौसम में रात को सोते समय पसीना आता है। ज्यादा ठंड में भी टीबी मरीज को पसीना आता है और पानी पीने के बावजूद मुंह सूखने लगता है।

वजन कम होना –
क्षय रोगी के वजन में तेजी से कमी होने लगती है। क्योंकि क्षय रोग होने पर मरीज को भूख नहीं लगती और खाने के प्रति उसकी रूचि बहुत कम हो जाती है। खाना अच्छे से पच नहीं पाता है।
 
थूक से खून निकलना –
क्षय रोगी को खांसी आने पर निकलने वाले बलगम में थूक आने लगता है। ज्यादा खांसी होने पर अक्सर खून की उल्टियां भी आने लगती हैं। इसके अलावा टीबी मरीज के लार से भी खून निकलने लगता है।

सांस लेने में दिक्कत -
क्षय रोगी को अक्सरर खांसी आती जिससे फेफडा फूलता है और सांस लेने में दिक्कत होती है। खांसी की वजह से हृदय की मांसपेशियों में भी सिकुडन शुरू हो जाती है।

सीने में दर्द होना -
क्षय रोगी को बार-बार खांसी सीने में तेज दर्द होने लगता है। लगातार खांसी आने से टीबी के मरीज को भयंकर चेस्ट पेन होता है जिसे वह बर्दास्त नहीं कर पाता।

फेफडों पर असर -
जब ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया सांस के जरिए फेफडे तक पहुंचता है तो बहुत जल्दी ही वह कई गुना बढ जाता है।



क्षय रोग किड्नी, हड्डी, मस्तिष्क और स्पाइनल कार्ड जैसे शरीर के अंगों को प्रभावित करता है। टीबी की शुरूआत में रोग प्रतिरोधक क्षमता शरीर पर इसके बढते प्रभाव को कम करने में मदद करता है लेकिन धीरे-धीरे शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।

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