क्षय रोग और एच आई वी में संबंध

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Mar 23, 2012
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Chhay rog aur hiv me sambandh

ट्यूबाकुलोसिस के शॉर्ट नाम को टी.बी कहा जाता है। क्षयरोग से कई लोगों की मौत भी हो जाती है। क्‍या आप जानते हैं यदि आप किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं तो आपमें क्षयरोग होने की संभावना अधिक रहती हैं। गंभीर बीमारियों में डायबिटीज, एड्स जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्‍यों होता है। दरअसल एड्स और डायबिटीज जैसी बीमारियों से मरीज बहुत कमजोर हो जाता है और मरीज का इम्‍यून सिस्‍टम भी कमजोर हो जाता है जिससे मरीज में ट्यूबरकुलोसिस का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन आप सोच रहे होंगे क्षयरोग और एचआईवी में संबंध क्‍या हैं। एच आई वी में टी.बी होने पर मरीज को मौत का जोखिम भी हो सकता है या फिर मरीज की अवस्‍था गंभीर हो जाती है। यह सब जानना बेहद जरूरी है। तो आइए देखें क्षयरोग और एच आई वी में संबंध क्‍या हैं।

  • क्‍या आप जानते हैं दुनिया भर में मरीजों की मौत का प्रमुख कारण एचआईवी संक्रमण के साथ टी.बी होना है।

  • ऐसा अनुमान लगाया गया है कि अमेरिका में रहने वाले लगभग 4.2 फीसदी लोग एच आई वी के साथ और एच आई वी के बिना टी.बी.के बैक्‍टीरिया से संक्रमित हैं।

  • 2005 की एक रिपोर्ट के अनुसार, एचआईवी के साथ ही तपेदिक से संक्रमित होने वाले लगभग 63 फीसदी लोग अमेरिका में रह रहे अफरीकन (Non-Hispanic blacks) लोग हैं।



क्षय रोग और एच आई वी में संबंध

  • एच आई वी और टी.बी एक-दूसरे से बहुत हद तक जुड़े हुए हैं और एच आई सी से टी.बी संक्रमण बहुत आम समस्‍या है।


  • किसी भी व्‍यक्ति को एक बीमारी होने से अधिक दो बीमारियां होने से अधिक खतरा होता है इससे मरीज को मौत का जोखिम भी बढ़ जाता है।


  • विकासशील देशों में एड्स पीडि़त मरीज को सबसे पहले तपेदिक का ही खतरा होता है।


  • टी.बी. की बीमारी को बढ़ाने में एच आई वी का बहुत बड़ा हाथ है। क्‍या आप जानते हैं दुनियाभर में कम से कम 38.6 मिलियन लोग एच आई वी पॉजिटिव हैं जिनमें से एक तिहाई लोग टी.बी से संक्रमित हैं। इसीलिए टी.बी का जोखिम एच आई वी संक्रमित मरीजों में और बढ़ गया है।


  • क्‍या आप जानते हैं एच.आई.वी से ग्रसित व्‍यक्ति यदि टी.बी. बेसिलीस से संक्रमित हो जाए तो उसको टी.बी होने का खतरा लगभग छह गुना बढ़ जाता हैं।


  • ऐसा नहीं कि एड्स के मरीजों में टी.बी का उपचार संभव नहीं बल्कि मरीज का सही समय पर उपचार किया जाए तो ना सिर्फ मरीज में टी.बी को बढ़ने से रोक सकते हैं बल्कि मौत के जोखिम को भी टाला जा सकता है।


  • क्षय रोग किसी आम व्‍यक्ति को भी हो सकता है लेकिन एड्स पीडि़त व्‍यक्ति के लिए यह खतरा सामान्‍य से दुगुना होता है।


  • यदि एच आई वी पीडि़त मरीज टी.बी का ईलाज बीच में ही छोड़ दे तो उसके प्रतिरोधक क्षमता पर तो असर पड़ता ही है साथ ही मरीज में टी.बी के जीवाणुओं की संख्‍या और अधिक बढ़ जाती है और मरीज का ठीक होना मुश्किल हो जाता है।
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