क्या सेकेंडरी बोन कैंसर की चिकित्सा संभव है

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 02, 2012
Comment

Subscribe for daily wellness inspiration

Like onlymyhealth on Facebook!

किसी भी व्यक्ति को जब यह पता चलता है कि उसे कैंसर है तो यह उसके व उसके परिवार वालों के लिए यह किसी सदमे से कम नहीं होता।

 

kya secondary bone cancer ki chikitsa sambhav hai

 

किसी को भी, किसी उम्र में हो सकता है। यह रोगी के शरीर के किसी भी अंग में हो सकता है। रोगी के शरीर में होने वाले पहले कैंसर ट्यूमर को ‘प्राईमरी ट्यूमर’ कहते हैं। जब कैंसर सेल्स वहां से शरीर के किसी और हिस्से में फैलने लगे और ट्यूमर बन जाए तो इसे ‘सेकेंडरी ट्यूमर’ व ‘मेटास्टेसिस’ के नाम से जाना जाता है। इसी तरह जब बोन कैंसर शरीर के किसी अन्य हिस्से की हड्डी में हो जाए तो उसे ‘सेकेंडरी बोन कैंसर’ कहते हैं। समसामयिक तकनीक व विकसित इलाज के जरिए सेकेंडरी बोन कैंसर का निवारण किया जा सकता है।

भले ही कैंसर अब लाइलाज न रहा हो, लेकिन फिर भी इसका नाम और इसकी भयावहता कम नहीं हुई है। सही समय पर अगर कैंसर के लक्षणों के बारे में पता चल जाए तो इसका कारगर इलाज किया जा सकता है।

 

इलाज

सेकेंडरी बोन कैंसर का इलाज प्राइमरी बोन कैंसर पर निर्भर होता है और अक्सर दोनों में एक ही तरह के इलाज का प्रयोग किया जाता है।

[इसे भी पढ़ें- बोन कैंसर की शुरुआती अवस्‍था के लक्षण]

रेडिएशन थेरेपी

कैंसर के इलाज की तीन प्राथमिक अवस्था होती है। रेडिएशन थेरेपी अकेले भी की जा सकती है या सर्जरी व कीमोथेरेपी के साथ भी कर सकते है।

कीमोथेरेपी

कीमोथेरेपी में दवाओं के जरिए सेकेंडरी बोन कैंसर का इलाज करते हैं और इसके बढ़ते सेल्स को नष्ट करते हैं।

बॉयोथरेपी

इसमें रोगी के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता से सेकेंडरी बोन कैंसर का इलाज किया जाता है और अन्य इलाज के तरीकों के कुछ दुष्प्रभावों को कम किया जाता है।

इलाज से रोगी के स्वस्थ होने की संभावना

एक बार जब कैंसर के सेल्स हड्डियों में फैल जाते हैं तो उनका निवारण करना बहुत मुश्किल हो जाता है। लेकिन रोगी को उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए क्योंकि यह अब लाइलाज नहीं है। नए विकसित तकनीक वाले इलाज के जरिए अब कैंसर रोगी का जीवन बेहतर हो सकता है। एडवांस सेकेंडरी बोन कैंसर के इलाज में सामान्यत:  रोगी को लगातार दर्द कम करने वाला इलाज दिया जाता है जिसका काम होता है कैंसर के लक्षणों को कम करना। एडवांस स्टेज में कैंसर को दूर करना बहुत मुश्किल होता है, इसमें रोगी की जीवित रहने की दर बहुत कम होती है। जो रोगी ठीक तरह से कैंसर का इलाज व थेरेपी ले रहा है वो दो या तीन साल तक जीवित रह सकता है।

[इसे भी पढ़ें- बोन कैंसर की वैकल्पिक चिकित्‍सा]

इलाज के बाद औसतन सेकेंडरी बोन कैंसर में रोगी लगभग 24 से 36 महीने तक जीवित रह सकता है। रोगी की आयु संभाविता उसके पूरे स्वास्थ्य (शारीरिक, मानसिक) पर निर्भर करती है।  ऐसी हालत में रोगी की आयु संभाविता में उसके साथियों व परिवार वालों से मिलने वाले सहयोग का अहम रोल होता है।     

सेकेंडरी बोन कैंसर के रोग का निदान व जीवित रहने की दर सभी कैंसर रोगियों की अलग अलग होती है। आकड़ों के आधार पर किसी भी रोगी की आयु संभाविता नहीं आंकी जा सकती है।

 

Read More Articles on Cancer in Hindi

Write Comment Read ReviewDisclaimer Feedback
Is it Helpful Article?YES3 Votes 12931 Views 2 Comments
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर