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वी एल के लक्षण निम्न रूप में बांटे जा सकते हैं:
इसके विशिष्ट नैदानिक लक्षण लंबे समय तक रहते हैं जिनमें अनियमित रूप से बुखार आते जाते रहते हैं जिसके साथ कोई जरुरी नहीं है कि किसी प्रकार की कठोरता या ठंड जुड़ा हुआ हो। इसके अन्य लक्षण एस्प्लेनोमेगले, लीम्फाडिनोपेथी, हेपाटोमेगले और प्रगतिशील एनीमिया हैं । कुछ रोगियों का वजन कम हो सकता है तथा हाइपरगामाग्लोब्युलिनेमिया के साथहाइपोअल्ब्युनेमिया हो सकता है। अगर इसका उचित इलाज नहीं किया गया तो यह रोग लगभग प्राणघातक होता है । काला अजार को अक्सर लोग मलेरिया, टाइफाइड या तपेदिक समझने की भूल कर बैठते हैं क्योंकि इनके लक्षण और बाकी रोगों के लक्षण लगभग एक जैसे होते हैं। कुछ रोगियों को अन्य दूसरी बीमारियों के साथ काला अजार भी हो जाता है; ऐसी स्थिति में काला अजार को पहचान पाना और भी मुश्किल हो जाता है।
इंडियन बोझ (आबादी का कितना प्रतिशत भाग इस रोग से पीड़ित हैं, और देश के किस हिस्से में यह समस्या सबसे अधिक है)
पुरे विश्व में (लगभग 88 देशों में रहने वाले लोगो में) तकरीबन 350 मिलियन लोगों में काला अजार होने का जोखिम है और अनुमानतः 500,000 लोग इस जानलेवा बीमारी से ग्रसित हैं। यह रोग दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र में बहुत हीं आम है और लगभग 200 मिलियन लोगों के इसकी चपेट में आने का खतरा है।

