आमतौर से कपोसिस सरकोमा के शुरूआती लक्षणों में त्वचा पर लाल, बैगनी या भूरे धब्बे, निशान या पिंड या फिर अक्सर खरोंचें आदि दिखाई देती हैं। कपोसिस सरकोमा के क्लॉसिक और इम्यूनोसप्रेसिव रूपों में ये घाव धीरे-धीरे बढ़ते हैं और कई वर्षों में विकसित होते हैं। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है पैरों में नीचे सूजन आ सकती है और कुछ मामलों में बीमारी दूसरे अंगों तक फैल सकती है।
एड्स-रिलेटेड रूप में ट्यूमर काफी घातक होता है अक्सर फैलकर बड़े हिस्सों को ढंक लेता है और ट्यूमर की तरह ही पिंड बनाता है। आमतौर से शुरू में ये घाव कोमल और मुलायम होते हैं लेकिन समय के साथ-साथ ये कठोर और ठोस होते जाते हैं। ट्यूमर की सतह इन्फेक्शन पैदा करने वाले खुले अल्सरों का निर्माण कर सकती है। बीमारी केवल त्वचा तक ही सीमित नहीं रहती यह अक्सर मुंह, लिम्फ नोड्स, फेफड़ों, लिवर, तिल्ली और पेट के अंगों को प्रभावित करती है।
फेफड़ों में ट्यमर के कारण अक्सर खांसी, सांस फूलना और घरघराहट होती है। फेफड़ों में बीमारी तेजी से फैलती है जिसके फलस्वरूप श्व़सन की असफलता से मृत्यु हो सकती है। हालांकि जब बीमारी पेट के अंगों में होती है तो बीमारी के अधिक फैलने से पहले बहुत ही कम लक्षण प्रकट होते हैं। इस स्थिति में लोगों में आंत में रूकावट (जी मिचलाना, उल्टी, और पेट दर्द) या मल में रक्त के लक्षण प्रकट हो सकते है। यदि लिम्फ नोड्स तक यह हो गया है तो आमतौर से पैरों या चेहरे पर सूजन आ सकती है।

