आफिस में गॉसिप

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 13, 2011
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Two  Womanगॉसिप का रिश्ता सिर्फ नकारात्मक विचारो से है। यह देखा गया है कि गॉसिप करने से दुर्भावनापूर्ण विचार(एक बेहतर शब्दो या अच्छे विचारो की कमी ) अर्थात गंदी अफवाहें फैलती है और लोगो के बारे में हानिकारक टिप्पणीयां बनती है। लेकिन सच यह है कि हम सभी गॉसिप करते है। गॉसिप  करने की प्रवृत्ति हमारे जीवन स्वाभाविक है। कुछ दोषी महिलाएं में गॉसिप करने की प्रवृति होती है, लेकिन यह भी सच है कि पुरुष वास्तव में महिलाओ की गॉसिप का आनंद लेने इनंकार नही कर सकते। और वहां कार्यस्थल पर  गॉसिप नही करते है? यह तो ऐसे ही होगा जैसे समुंद्र का पानी नमक के बिना हो।

आफिस में गॉसिप करना उसी तरह है जैसे हम टेबल, कुर्सी, और कम्प्यूटर पर काम करते है और इन दिनो वास्तव में बॉस और मैनेजर भी गॉसिप को बढावा देते है। अपना नाम न बताने की शर्त पर एक मैनेजर ने बताया, इससे टीम के सदस्यो के बीच सम्पर्क बनाए रखने और एक दूसरे से रिश्ता बनाने में मदद मिलती है। वह विश्वास करते है कि यह नजदीकता बढाने में और परिणामस्वरुप कार्य में आपके रिश्ते को बेहतर बनाता है।

सामाजिक वैज्ञानिको का कहना है कि गपशप करना एक सामाजिक कला है। बहुत समय नही हुआ है जब काम करने वाले के दो ग्रुप होते थे एक तो जो गॉसिप करते है और दूसरे जो गॉसिप नही करते। आज वह नए ग्रुपो में बंट गए है एक जो गॉसिप करने में माहिर है और दूसरे जो गॉसिप करने में माहिर नही है। जैसे कि हमेशा से होता आया है कि व्यक्ति एक सामाजिक प्राणी है वह गॉसिप किए बिना नही रह पाता मनोवैज्ञानिक कहते है। पहले से माना जाता है कि व्यक्ति अपने आस-पास के वातावरण से सिखता है और परिवार में रहकर भी गॉसिप करना सिखता है, गॉसिप हमारे जीवन का अहम हिस्सा है। यह दोस्ती में दृढ़ता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और जीवन में रिश्तो को लंबे समय तक बनाए रखता है।
गॉसिप करने की सकारात्मक से इनकार करते हुए मनोचिकित्सक डॉ रचना सिंह,एर्टमिस का कहना है, हां गॉसिप करने से आफिस में मदद मिलती है लेकिन तभी जब आप नकारात्मक रिलेशनशिप बनाना चाहते है। मुझे तो गॉसिप करने में ऐसा कुछ नही लगता जो बढ़िया हो, अगर आप इस बात को लेकर गंभीर है और आफिस में सबके चहेते बनना चाहते हो तो इसके पीछे कोई ठोस वजह होनी चाहिए। उन्होने जोर से कहा

आफिस में गॉसिप को लेकर अपने अनुभवो का जिक्र करते हुए शेलजा सुब्रहमणियम कहती है। जब मे गॉसिपो में शामिल होती तो मुझे लगता है कि मै टीम का हिस्सा हूँ और उन्ही में से एक हूं.....वह जोर से कहती है अगर वह मुझसे कुछ छिपाते है तो मुझे लगता है जैसे मुझे बहिष्कृत कर दिया हो। ऐसा नहीं है कि सभी गॉसिप अच्छे है। एक दुर्भावनापूर्ण या नटखट कहानी में उसे और उसके बॉस को शामिल करते हुए एक दुर्भावनापूर्ण या नटखट कहानी का अंत करते सुब्रमणियन सचेत होते हुए कहती है कि जरुरी नही है कि सभी गॉसिप अच्छी हो, लेकिन देखते हुए भी इनसे कैसे बचा जा सकता,"यदि आप दूसरो के बारे में गॉसिप करते है, तो वे भी आपके बारे में गॉसिप करते है", वह इससे स्वाभाविक रुप से सहमत है, यह सब जीवन का एक हिस्सा है।

मैनेजर भी गॉसिप का इस्तेमाल अपने कर्मियो पर नज़र बनाए रखने के लिए करते है। अगर टीम के लोग यह जानते है कि बॉस खुद हर समय गॉसिप करने के लिए तैयार हो तो वो देरी से आते है इससे उन्हे अपने में शामिल नही किया जा सकता। इसलिए उल्लेखित मैनेजर जांचता है। लेकिन बात तब बढ़ जाती है जब गैर जिम्मेदाराना तरीको और लोगो के बारे में दुर्भावनापूर्ण गॉसिप की जाती है। आफिस में गॉसिप करने से कोई आहत हो सकता है और यह व्यक्ति के आत्मसम्मान को भी ठेस पहुचा सकता है, लेकिन जब सीमा के भीतर रहकर गॉसिप की जाए तो इसमें बहुत आनंद है, यह बहुत मजेदार हो सकता है या इसमे आप बहुत मजा ले सकते है।

लेकिन आफिस में नैतिकता बनाने को लेकर क्या? डॉ सिंह आगे कहती है इससे लोगो से सामने आपकी छवि बिगङती है। लोग आप पर विश्वास करना छोङ देंगे और नैतिकता की हद में गॉसिप के लिए कोई जगह नही है। आगे बढ़ने के और भी कई रास्ते है। उन्हे आजमाओ। वो सख्ती से सलाह देते हुए कहती है।

यह किसी भी सूचना पत्र से बेहतर है आपको आपके कार्यस्थल पर सभी घटनाओ की जानकारी देता है। और इसके अतिरिक्त रिशतो को बनाने में लाभदायक भी है क्योकि इससे आप एक दूसरे के संपर्क में रहते है। तो, आगे बढ़िये, एक कॉफी-ब्रेक ले और सभी घटनाओ की जानकारी लेकर आनंद उठाएं!

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