आपका भोजन आपको बीमार तो नहीं कर रहा

By  ,  सखी
Dec 20, 2010
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आहार असह्यनीयता आजकल बहुत अधिक होने लगी है। यह जानलेवा तो नहीं होती लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह आपके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव अवश्य डालती है। हममें से अधिकतर लोगों की यह समझ में ही नहीं आता कि हमारा भोजन हममें थकावट, सिरदर्द तथा कई अन्य तकलीफों को बढ़ा रहा है। क्योंकि यह पता लगाना बहुत मुश्किल होता है कि खमीर युक्त आहार लेने से आपके गले में खराश हो रही है अथवा डेरी उत्पादों का प्रयोग आपकी साइनस की समस्या को बढ़ा रहा है। इन समस्याओं की जानकारी के लिए विश्वभर के डॉक्टरों द्वारा बायोएनर्जेटिक स्ट्रेस टेस्टिंग (बेस्ट) का प्रयोग किया जा रहा है।

 

क्या होता है इस टेस्ट में 

 

इस टेस्ट में हाथ पर घाव के परीक्षण की सलाई के प्रयोग द्वारा डॉक्टर शरीर में होने वाले ऊर्जा सहनीयता में आने वाली भिन्नताओं का निरीक्षण करता है। कंप्यूटर के माध्यम से अत्यंत लघु इलेक्ट्रॉनिक्स संकेत प्रेषित करता है और इसके परिणाम उस व्यक्ति की प्रतिक्रिया को दर्शाते हैं, जिन्हें रिकार्ड कर लिया जाता है। इस बहुउपयोगी टेस्ट के द्वारा न केवल किसी अकल्पनीय खाद्य पदार्थ जैसे चॉकलेट और आइसक्रीम जो सभी को प्रिय होते हैं उनके प्रति खाद्य असह्यता की जानकारी प्राप्त की जा सकती है बल्कि किसी भी चीज जैसे घरेलू धूल, मिट्टी, किसी विशेष रसायन से होने वाली खाद्य असह्यता की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

 

इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है कि आपकी बारह मास रहने वाली थकावट का कारण आपका भोजन हो। इसके उपचार में प्राकृतिक चिकित्सा भी लाभकारी सिद्ध हो सकती है। प्राकृतिक चिकित्सक आरंभ में आपके खाने की आदतों, जीवनशैली और वर्तमान स्वास्थ्य की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करते हैं। हो सकता है कि आपका भोजन पौष्टिक और संतुलित हो लेकिन फिर भी आपमें थकान और सुस्ती रहती हो। हम इसका अंदाजा तक भी नहीं लगा पाते कि हमारा भोजन ही हमें बीमार कर रहा है।

 

कैसे होती है खाद्य असह्यता 

 

जब किसी खाद्य पदार्थ के प्रति असह्यता उत्पन्न होती है तो उसे ग्रहण कर लेने पर हमारे रोग प्रतिरोधक तंत्र की अभिक्रिया बढ़ जाती है और इससे आहार नली लीक करने लगती है। फिर आंशिक रूप से पचे हुए खाद्य पदार्थो के कण रक्त परिसंचरण में मिल जाते हैं और श्रृंखला अभिक्रिया करते हैं जिसके परिणामस्वरूप आधासीसी, वजन बढ़ना और गठिया जैसे रोगों के लक्षण नजर आने लगते हैं धीरे-धीरे अति सूक्ष्म किंतु विपरीत प्रभाव डालने वाले खाद्य पदार्थो की संख्या और उनकी गंभीरता बढ़ती जाती है।

 

ये लक्षण अक्सर विविध होते हैं लेकिन स्थिर नहीं और ये व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। इसके कारण व्याकुलता, मुंह का अल्सर, जोड़ों और मांसपेशियों का दर्द, सिरदर्द, साइनस, कफ और पाचन समस्याएं जैसे अपचन, गैस इत्यादि अतिक्रियाशीलता और वजन बढ़ने जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। आम तौर पर पाई जाने वाली खाद्य असह्यता कॉफी, चाय और चॉकलेट इत्यादि पदार्थो से होती है।

 

आनुवांशिक रोग एवं खाद्य असह्यनीयता

 

कोई-कोई खाद्य असह्यनीयता आनुवांशिक रोगों के कारण होती है। आनुवांशिक रोग में विशिष्ट कोशिका एन्जाइम (सभी एन्जाइम प्रोटीन होते हैं) जो एक विशिष्ट पोषक तत्व के कोशिका उपापचय का नियंत्रण करते हैं वे लुप्त हो जाता है। इस प्रकार उस विशिष्ट पोषक तत्व का कार्य इस बिंदु पर रुक जाते हैं। इसमें लैक्टोज, ग्लैक्टोसेमिया आनुवांशिक रोग की खाद्य असह्यता प्रमुख है।

 

खाद्य असह्यता का इलाज 

 

खाद्य असह्यता का पता तभी लग सकता है जब हम अपनी सेहत के प्रति जागरूक हों। हममें से ज्यादातर लोग यह मानते हैं कि हम अच्छा भोजन करते हैं, फल और स्वच्छ सब्जियों का प्रयोग करते हैं तो हममें ऐसे लक्षण नहीं हो सकते, परंतु ऐसा नहीं है। खाद्य असह्यता टेस्ट में डॉक्टर विभिन्न प्रकार की जांच के द्वारा आप किस पदार्थ के प्रति संवेदनशील हैं इसका पता लगा लेते हैं। इसके लिए भोजन के पूरकों का कार्यक्रम तैयार किया जाता है। भोजन के मेनू में कुछ बदलाव किए जाते हैं, जिसके परिणाम आपके लिए आश्चर्यजनक हो सकते हैं। खाद्य असद्ययता के इलाज से आपकी   कई अन्य बीमारियों जैसे ग्रंथियों की सूजन, एक्जिमा इत्यादि भी ठीक हो सकते हैं। परंतु भारत में अभी भी इस तरह की खाद्य असह्यनीयता की जांच पर ध्यान नहीं दिया जाता। बड़े-बड़े अस्पतालों में भी अभी इस बीमारी की जांच की कोई निश्चित पद्धति विकसित नहीं है। अभी यहां पर खाद्य असह्यता के परिणामों को गंभीरता से नहीं लिया जाता। लेकिन अमेरिका और ब्रिटेन इत्यादि विकसित देशों में यह बहुत प्रचलित है।

 

क्या आप जानती हैं 

 

आंकड़ों के अनुसार ब्रिटेन में 45 प्रतिशत लोगों को किसी न किसी प्रकार की खाद्य असह्यता है। इनमें गाय के दूध, अंडे की जर्दी, बादाम और सोयाबीन के प्रोटीन के कारण 90 प्रतिशत खाद्य असह्यता होती है।

 

क्या आप जानते हैं कि आपकी आंखों के नीचे काले घेरे होने की वजह भी खाद्य असह्यता होती है। यदि आप नींद पूरी लेती हैं इसके बावजूद भी ये घेरे बने हुए हैं तो आप अपने भोजन में से चार दिनों के लिए गेहूं के प्रयोग को बंद कर दें। यह आपके लिए सहायक सिद्ध हो सकता है।

 

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