अस्‍थमा के लंबे समय तक रहने वाले प्रभाव

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 24, 2009
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Quick Bites

  • अस्‍थमा के कारण बनने लगता है अधिक कफ।
  • सांस की समस्‍या के कारण अधिक व्‍यायाम नहीं कर पाते।
  • अस्‍थमा के कारण फेफड़ों को होता है नुकसान।
  • सही समय पर दवाओं का सेवन है जरूरी।

अस्‍थमा एक गंभीर बीमारी है। इसका पूरी तरह इलाज किया जाना संभव नहीं है। हालांकि, कुछ तरीके हैं जिन्‍हें अपनाकर आप इस बीमारी को नियंत्रित जरूर कर सकते हैं। इस बीमारी को नियंत्रित करके आप इसके दीर्घकालिक प्रभावों से भी बचे रह सकते हैं।

सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि अस्‍थमा ऐसी बीमारी है जिसके मुख्‍य रूप से तीन मुख्‍य लक्षण होते हैं:

 

  • फेफड़ों में अधिक मात्रा में कफ जमा होना।
  • श्‍वास नली और उसके आसपास की मांसपेशियों का संकरा होना
  • श्‍वास नली में सूजन


इन सभी कारणों से आपकी सेहत पर काफी गहरा असर पड़ता है।

asthma in hindi

अस्‍थमा के मरीजों को खांसी में आता है अधिक कफ

फेफड़ों में मौजूद कोशिकायें साइटोकिन्‍स नाम के केमिकल का स्राव करती हैं, जिससे श्‍वास नली में अधिक कफ जमा होने लगता है। यह कफ श्‍वास नली में जमा हो जाता है, जिससे अस्‍थमा अटैक के दौरान आपको खांसी और गले में घरघराहट होने लगती है।

दीर्घकालिक नजर से देखा जाए तो यह कफ कई प्रकार का संक्रमण पैदा कर सकता है। यानी इससे आपको निमोनिया हो सकता है। अगर इस प्रकार का संक्रमण बार-बार होता रहे तो आपकी समस्या में इजाफा हो सकता है। शरीर एंटी बायोटिक्‍स के प्रति अधिक असंवेदनशील हो जाता है। इसके साथ ही फेफड़ों में भी जख्‍म आदि हो सकता है। इस तरह के जख्‍मों को ठीक नहीं किया जा सकता, जिससे फेफड़ों को स्‍थायी नुकसान पहुंच सकता है।


कफ जमा होने से रोकने के लिए, जरूरी है कि आप अस्‍थमा के अटैक को होने से रोकें। और ऐसा करने के लिए सही समय पर दवाओं का सेवन करना चाहिये। ये दवायें अस्‍थमा अटैक और कफ के अटैक को रोकने का काम करती हैं। यदि गले में कफ का निर्माण कम हो तो आप निमोनिया और ब्रोंचिटिस के संभावित खतरे को रोक सकते हैं। आप इस बारे में अपने डॉक्‍टर से भी बात कर सकते हैं।

 

अस्‍थमा के कारण संकरापन और घरघराहट क्‍यों होती है

अस्‍थमा के दौरान सांस नली और उसके आसपास काफी संकरापन हो जाता है। चिकित्‍सीय भाषा में इसे ब्रोन्‍कोस्‍पस्‍म कहा जाता है। जब यह परिस्थिति गंभीर हो जाती है, तो इससे व्‍यायाम करने की आपकी क्षमता पर असर पड़ता है। इससे मोटापा, डायबिटीज, उच्‍च रक्‍तचाप और असक्रिय जीवनशैली से होने वाली अन्‍य बीमारियां हो सकती हैं।

अगर आप अस्‍थमा के कारण व्‍यायाम नहीं कर पा रहे हैं, तो इसे नियंत्रित किया जाना संभव है। अगर आप इस समस्‍या से ग्रस्‍त हैं तो व्‍यायाम से 15-20 मिनट पहले इनहेलर का इस्‍तेमाल किया जा सकता है। इसके साथ ही अगर ज्‍यादा जरूरत महसूस हो तो आप व्‍यायाम के दौरान भी इन्‍हेलर का इस्‍तेमाल कर सकते है। अपने चिकित्‍सक से पूछकर आप अन्‍य तरीके भी अपना सकते हैं। इस बात का पूरा खयाल रखिये कि अस्‍थमा का असर आपके व्‍यायाम पर नहीं पड़ना चाहिये।

 

asthma effects in hindi

अस्‍थमा हो जाए अनियंत्रित तो ?

अस्‍थमा में सामान्‍यत: मांसपेशियों में सिकुड़न, अधिक कफ और श्‍वास नली में सूजन जैसी गंभीर और दीर्घकालिक समस्‍यायें भी होती हैं। एयरवे रेमोल्‍ड‍िंग में काफी वर्ष तक लग सकते हैं। इससे फेफड़ों को भी स्‍थायी नुकसान पहुंच सकता है।

अगर अस्‍थमा के कारण फेफड़ों को नुकसान पहुंच जाए तो फिर क्षतिग्रस्‍त कोशिका को सामान्‍य को‍शिका से बदला जाता है। क्षतिग्रस्‍त कोशिकायें सामान्‍य कोशिकाओं की तरह काम नहीं करतीं। कुछ मरीजों को गंभीर समस्‍याओं का सामना करना पड़ता है। इसका नुकसान यह होता है मरीज के फेफड़ों की क्षमता पूरी तरह खत्‍म हो जाती है।

अस्‍थमा को नियंत्रित रखकर ही इसके दीर्घकालिक प्रभावों से बचा जा सकता है। तो इसके लिए जरूरी है कि आप इसके असर को कम करने वाली दवाओं का सही प्रकार से सेवन करें। इसके साथ ही आपको स्‍वस्‍थ जीवनशैली अपनानी चाहिये।

 

Image Courtesy- Getty Images

 

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