अर्थराइटिस के दर्द से राहत दिलाए व्यायाम

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 24, 2009
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Quick Bites

  • डॉक्‍टर से पूछकर ही करें व्‍यायाम।
  • जोड़ों पर न डालें जरूरत से ज्‍यादा जोर।
  • धीरे-धीरे ही करें व्यायाम की शुरुआत।
  • व्‍यायाम से मजबूत होती हैं मांसपेशियां।

अर्थराइटिस के मरीज को व्‍यायाम शुरू करने से पहले अपनी क्षमताओं और सीमाओं को समझ लेना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही आपके लिए यह जान लेना भी आवश्‍यक है कि आखिर किस स्‍तर का व्‍यायाम आपके लिए फायदेमंद रहने वाला है।

exercise in arthritisअर्थराइटिस के मरीजों के लिए व्‍यायाम काफी फायदेमंद होता है। इससे उनमें शक्ति और फ्लेक्‍सिबिलिटी बढ़ती है और जोड़ों में दर्द कम होता है। इसके साथ ही थकान से लड़ने की उनकी क्षमता में भी इजाफा होता है। बेशक, जब जोड़ों में बेइंतहा दर्द हो,  तो सैर और तैराकी जैसे व्‍यायामों के बारे में सोचना भी आपकी तकलीफ में इजाफा कर सकता है।



लेकिन, अर्थराइटिस के लक्षणों को दूर करने के लिए आपको न तो मैराथन दौड़ना है और न ही लगतार तेज तैरना है। मद्धम व्‍यायाम भी आपके दर्द को कम करने और आपके वजन को नियंत्रित करने में मददगार स‍ाबित हो सकते हैं। जब अर्थराइटिस का दर्द आपको डराता है, तो व्‍यायाम आपके लिए काफी मददगार साबित हो सकता है। अगर यकीन न हो, तो हमारा यह लेख पढि़ये।


क्‍यों जरूरी है व्‍यायाम

व्‍यायाम आपके जोड़ों को नुकसान पहुंचाए बिना आपकी सेहत और फिटनेस में इजाफा कर सकता है। आप जो इलाज फिलहाल ले रहे हैं उसके साथ अगर आप व्‍यायाम भी करने लगें, तो आपको कई अन्‍य लाभ भी मिल सकते हैं, जैसे-

  • जोड़ों के आसपास की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं।
  • आपकी हड्डियों को शक्ति मिलती है।
  • दिनभर के लिए आपको अधिक शक्ति और ऊर्जा मिलती है।
  • रात में आपको अच्‍छी नींद मिलती है।
  • आपको वजन काबू में रखने में मदद मिलती है।
  • आप अपने बारे में बेहतर महसूस करते हैं।



आपके मन में यह विचार आ सकता है कि व्‍यायाम आपके जोड़ों के दर्द की तकलीफ और बढ़ा सकता है, लेकिन वास्‍तव में ऐसा नहीं है। दरअसल, व्‍यायाम न करना या कम करना आपकी तकलीफ में इजाफा ही करेगा। हड्डियों के आसपास की मांसपेशियों और कोशिकाओं को मजबूत बनाए रखने के लिए व्‍यायाम बहुत जरूरी है। व्‍यायाम न करने से वे मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे जोड़ों पर अधिक दबाव पड़ता है।

 

पहले अपने डॉक्‍टर से बात करें

सबसे पहले अपने डॉक्‍टर से बात करें कि आखिर किस प्रकार का व्‍यायाम आपके लिए ठीक रहेगा। आपको कौन सा व्‍यायाम करना चाहिए यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपको किस प्रकार का अर्थराइटिस है और आपके शरीर के कौन से जोड़ अर्थराइटिस से पीड़‍ित हैं। आपका डॉक्‍टर आपके लिए सर्वश्रेष्‍ठ व्‍यायाम योजना तैयार कर सकता है, जिससे आपके जोड़ों पर कम से कम दबाव पड़े और आपको अधिक से अधिक लाभ‍ मिले।

 

अर्थराइटिस के लिए व्‍यायाम

आपके लिए सर्वश्रेष्‍ठ व्‍यायाम चुनते समय डॉक्‍टर कई प्रकार के व्‍यायामों का एक सामंजस्‍य तैयार करेगा। जिसमें स्‍ट्रेंथनिंग व्‍यायाम, एरोबिक्‍स व्‍यायाम और अन्‍य व्‍यायाम शामिल होंगे।

 

रेंज ऑफ मोशन एक्‍सरसाइज

इस प्रकार के व्‍यायाम आपके जोड़ों की अकड़न को कम करते हैं जिससे आप अपने जोड़ों को बेहतर तरीके से हिला पाते हैं। रेंज ऑफ मोशन एक्‍सरसाइज में आप अपने जोड़ों को हिलाते हैं, जैसे दोनों हाथों को सिर के ऊपर उठाकर उन्‍हें आगे पीछे वृत्ताकार मूवमेंट में घुमाना। इस प्रकार के व्‍यायाम रोजाना या एक दिन छोड़कर दूसरे दिन किए जा सकते हैं।

 

स्‍ट्रेंथनिंग एक्‍सरसाइज

इस प्रकार के व्‍यायाम से जोड़ों की आसपास की मांसपेशियों को शक्ति मिलती है। इससे जोड़ों को सहारा मिलता है और उनकी रक्षा होती है। वेट ट्रेनिंग, स्‍ट्रेंथ ट्रेनिंग व्‍यायाम का ही एक प्रकार है। इससे आप अपनी मांसपेशियों की मौजूदा ताकत को बनाए रखते हैं या फिर उन्‍हें बढ़ा भी सकते हैं। आपको वैकल्पिक दिनों पर ऐसे व्‍यायाम करने चाहिए। लेकिन, जोड़ों में अधिक दर्द हो तो आप सप्‍ताह में दो बार ही इस प्रकार के व्‍यायाम करें।

 

एरोबिक व्‍यायाम

एरोबिक व्‍यायाम आपकी फिटनेस को बढ़ाने का काम करते हैं। ये आपकी कार्डियोवस्‍कुलर सेहत को बनाए रखते हैं। इससे आपका वजन काबू में रहता है और आपकी कार्यक्षमता बढ़ती है। आप अधिक ऊर्जावान महसूस करते हैं। कम-प्रभावी एरोबिक एक्‍सरसाइज आपके जोड़ों पर कम जोर डालती हैं। पैदल चलना, साइकिल चलाना और तैराकी इसी प्रकार के कुछ व्‍यायाम हैं। आप अपनी पसंद के हिसाब से इनमें से कोई भी व्‍यायाम चुन सकते हैं। आपको सप्‍ताह में तीन बार बीस से तीस मिनट तक इस प्रकार के व्‍यायाम करने चाहिए। अगर आपको तकलीफ हो रही हो, तो आप इसे 10 मिनट के तीन ब्‍लॉक में फिट कर सकते हैं।

 

अन्‍य एक्‍सरसाइज

कोई भी शारीरिक गतिविधि, फिर चाहे वो छोटी ही क्‍यों न हो आपके लिए काफी मददगार साबित हो सकती है। अगर कोई खास गतिविधि और व्‍यायाम आपको पसंद है, तो अपने डॉक्‍टर से यह पूछने में बिलकुल न घबरायें कि क्‍या वह आपके लिए फायदेमंद है। आपका डॉक्‍टर आपको योग के आसान आसन और ताई-ची करने की सलाह दे सकता है। ताई-ची आपको संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। अपने फिजिकल इंस्‍ट्रक्‍टर को भी अपनी परिस्थिति के बारे में जरूर बताएं, ताकि वह उसी हिसाब से आपके लिए कोई कार्यक्रम बनाए। जिससे आपको कम से कम दर्द हो।


अपने जोड़ों को बचाने के लिए टिप्‍स

अगर आप पिछले काफी समय से शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं हैं, तो अपने व्‍यायाम की धीमी शुरुआत करें। अगर आप शुरुआत में ही बहुत ज्‍यादा जोर डालेंगे, तो आप अपनी मांसपेशियों पर अतिरिक्‍त दबाव डाल सकते हैं। इससे आपके जोड़ों में अधिक पीड़ा हो सकती है।


व्‍यायाम शुरुआत करने से पहले अपनायें ये टिप्‍स

सिंकाई से करें शुरुआत

गर्म सिंकाई करें। गर्मी आपके जोड़ों और मांसपेशियों को आराम पहुंचाएगी, जिससे व्‍यायाम शुरू करने से पहले आपकी दर्द से राहत मिल जाएगी। हीट ट्रीटमेंट जैसे- गर्म तौलिया, हॉट पैक या फिर गर्म शॉवर इसमें आपकी काफी मदद कर सकता है। वॉर्म-अप करने के बाद अपने जोड़ों को धीरे-धीरे हिलायें। इसके बाद आप रेंज मोशन एक्‍सरसाइज से शुरुआत कर सकते हैं। इसके बाद आप स्‍ट्रेंथनिंग एक्‍सरसाइज और एरोबिक्‍स एक्‍सरसाइज कर सकते हैं।

धीरे-धीरे आगे बढ़ें

धीरे-धीरे ही आगे बढ़ें। आसान और धीमे मूवमेंट से ही एक्‍सरसाइज करें। अगर आपको दर्द का अहसास हो, तो एक ब्रेक ले लें। तेज और सामान्‍य से अधिक दर्द इस बात की ओर इशारा करता है कि कुछ सही नहीं है। अगर आपको जोड़ों में दर्द अथवा लालिमा नजर आए तो व्‍यायाम की गति धीमी कर दें।

इसके बाद बर्फ

इसके बाद बर्फ लगाएं। व्‍यायाम के आद अपने जोड़ों पर बर्फ लगाएं। खासकर ऐसे व्‍यायाम के बाद बर्फ जरूर लगाएं, जिनसे जोड़ों में सूजन आ गयी हो। अपने जोड़ों पर जरूरत से ज्‍यादा जोर न डालें। अधिक उत्तेजित न हों और अपने एक्‍सरसाइज का समय और तीव्रता बढ़ाएं।

अति अच्‍छी नहीं

अगर आप काफी समय से व्‍यायाम नहीं कर रहे हैं, तो आपको दर्द का अहसास हो सकता है। इस बात का ध्‍यान रखें‍ कि अगर व्‍यायाम करने के दो घंटे बाद तक भी आपके जोड़ों में दर्द होता रहता है, तो इसका अर्थ यह यह है आप अधिक जोर डालकर व्‍यायाम कर रहे हैं। अपने डॉक्‍टर से इस बारे में बात करें कि कितना दर्द सामान्‍य है और किस प्रकार का दर्द गंभीर है।

अगर आपको य्हूमेटॉइड अर्थराइटिस है, तो अपने डॉक्‍टर से पूछें कि आपको सामान्‍य अथवा लोकल फ्लेर में व्‍यायाम करना चाहिए अथवा नहीं। आप केवल रेंज मोशन एक्‍सरसाइज कर अपनी मांसपेशियों को जरूरी ताकत प्रदान कर सकते हैं।

अर्थराइटिस से पीड़‍ित लोगों का कैसा हो व्‍यायाम कार्यक्रम

कई बार कुछ हॉस्पिटल और क्लिनिक अर्थराइटिस ग्रस्‍त मरीजों के लिए खास हेल्‍थ प्रोग्राम चलाते हैं, इसके अलावा हेल्‍थ क्‍लब भी ऐसा काम करते हैं। आप अपने डॉक्‍टर से ऐसे स्‍थानों की जानकारी ले सकते हैं।

 

याद रखें अर्थराइटिस में व्‍यायाम काफी लाभदायक हो सकता है। बस जरूरत इस बात की है आप सही समय पर सही व्‍यायाम करें। इससे आपकी सेहत भी सही रहेगी और आपको अर्थराइटिस के दर्द से राहत भी मिलेगी।

 

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